Highlights:
भोपाल के एमपी नगर में प्रेस के लिए दी गई ज़मीन पर बना कमर्शियल कॉम्प्लेक्स
नेशनल हेराल्ड और नवजीवन के पूर्व कर्मचारी बीस साल से लड़ रहे हैं वेतन और ग्रेच्युटी के लिए
कर्मचारियों ने ईडी से ज़मीन की जांच की मांग की
बीडीए ने 2012 में लीज़ निरस्त कर दी थी, केस कोर्ट में लंबित
बीजेपी-कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज

—
➡️भोपाल :
भोपाल के कमर्शियल हब एमपी नगर में कभी नेशनल हेराल्ड, नवजीवन और कौमी आवाज़ जैसे अख़बारों के दफ्तर थे। आज वहां ऊंचे मॉल और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स खड़े हैं। सवाल उठ रहा है कि प्रेस के नाम पर दी गई जमीन कैसे व्यापारिक संपत्ति में तब्दील हो गई?
मोहम्मद सईद और संजय चतुर्वेदी जैसे 35 पूर्व कर्मचारी करीब बीस साल से वेतन, भत्तों और ग्रेच्युटी की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें अभी तक न तो एरियर्स मिले और न ही मेहनत का हक। वे इस मुद्दे को लेकर अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच की मांग कर रहे हैं।
कैसे मिली थी ज़मीन?
1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के कार्यकाल में भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) ने 1.14 एकड़ ज़मीन एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) को अंग्रेजी अखबार नेशनल हेराल्ड और हिंदी अखबार नवजीवन के प्रकाशन के लिए दी थी। कीमत थी सिर्फ एक लाख रुपये प्रति एकड़। शर्त थी कि ज़मीन का उपयोग प्रेस के लिए होगा।
फिर क्या हुआ?
1992 में प्रेस बंद हो गई, लेकिन कर्मचारियों को वेतन और अन्य लाभ नहीं मिले। 2011 में लीज़ की अवधि समाप्त हुई और 2012 में बीडीए ने ज़मीन की लीज़ निरस्त कर दी, यह कहते हुए कि ज़मीन का दुरुपयोग हो रहा है। इसके बाद वहां मॉल और कमर्शियल बिल्डिंग खड़ी कर दी गईं।
संजय चतुर्वेदी का आरोप है कि “2007 में 90 करोड़ का लोन लिया गया था, ज़मीन बेची गई, लेकिन पैसा कहां गया, इसका कोई हिसाब नहीं है। यह सब अवैध रूप से हुआ।”
ईडी से क्या मांग है?
पूर्व कर्मचारियों का कहना है कि ज़मीन और मशीनरी को लेकर फर्जीवाड़ा हुआ है। राजीव गांधी द्वारा भेजी गई प्रिंटिंग मशीन और ऐतिहासिक सिलेंडर मशीन भी अब नहीं मिल रही। सईद बताते हैं कि मशीनों की चोरी की रिपोर्ट भी दी गई, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने ईडी से मांग की है कि जिस तरह मुंबई, दिल्ली और लखनऊ में जांच हो रही है, वैसे ही भोपाल की नेशनल हेराल्ड ज़मीन की भी जांच हो।
राजनीतिक तकरार
ईडी की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब यह मामला सियासी तूल पकड़ रहा है।
बीजेपी के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा, “नेहरू परिवार ने अखबार की ज़मीन पर मॉल बनवाया, ये साफ भ्रष्टाचार है।”
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने जवाब दिया, “कांग्रेस को इससे कोई लाभ नहीं हुआ। यह संस्थान आज़ादी की लड़ाई से जुड़ा था, और ट्रस्टी ही इसके जिम्मेदार हैं।”




Leave a Reply