नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने 75 साल की उम्र में रिटायर होने की अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि “मैंने कभी यह नहीं कहा कि 75 साल पूरे होने पर पद छोड़ना चाहिए। न मेरे लिए और न ही किसी और के लिए।”
दरअसल, भागवत 11 सितंबर को 75 वर्ष के हो रहे हैं। उनके एक पुराने बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जोड़कर देखा जा रहा था, जिसके बाद यह अटकलें तेज हुईं। लेकिन भागवत ने कार्यक्रम “संघ की 100 वर्ष की यात्रा: नए क्षितिज” के समापन पर सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक गलतफहमी थी।
उन्होंने कहा – “संगठन जब तक चाहेगा, नेतृत्व को काम करना होता है। यदि 80 साल की उम्र में भी संगठन मुझे शाखा चलाने को कहेगा, तो मुझे करना पड़ेगा।”

भाजपा संग मतभेद पर सफाई
भागवत ने भाजपा से कथित मतभेद को भी खारिज किया। उन्होंने कहा – “हम तय करते तो भाजपा अध्यक्ष चुनने में इतना समय लगता क्या? टेक योर टाइम… फैसला भाजपा को ही लेना है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि सरकार और संगठन के बीच कुछ मुद्दों पर विचार अलग होना स्वाभाविक है, लेकिन ये मतभेद कभी मनभेद में नहीं बदलते। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मजदूर संघ और लघु उद्योग भारती के बीच भी कभी-कभी अलग दृष्टिकोण होता है।
सभी राजनीतिक दल हमारे लिए समान
भागवत ने साफ किया कि संघ किसी भी दल को अपना या पराया नहीं मानता। “जो भी राजनीतिक दल सहायता मांगता है, संघ सहयोग के लिए तैयार रहता है।”
उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और जयप्रकाश नारायण के उदाहरण भी दिए, जिन्होंने अलग-अलग दौर में आरएसएस पर भरोसा जताया।
अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर भी बोले
अमेरिका और चीन पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा – “अंतरराष्ट्रीय व्यापार जरूरी है, लेकिन दबाव में नहीं होना चाहिए। दोस्ती दबाव में नहीं पनपती। सरकार को हम नहीं बताएंगे कि ट्रंप से कैसे व्यवहार करें; वे जानते हैं क्या करना है।”
संघ के इस शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में अमेरिका और चीन समेत दो दर्जन दूतावासों एवं उच्चायोगों के 50 से अधिक राजनयिक मौजूद रहे।








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