- अमेरिका की मध्यस्थता के बाद भारत-पाकिस्तान संघर्ष विराम की घोषणा
- पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इसे ‘देश की जीत’ बताया
- भारत में चुप्पी, पूर्व सैन्य अधिकारियों और विपक्षी नेताओं ने जताई चिंता
- विदेश मंत्री जयशंकर का स्पष्ट रुख: आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं
- संघर्ष विराम के बाद भी उल्लंघन के आरोप, सीमा पर तनाव जारी
भारत-पाक संघर्ष विराम: पाकिस्तान में जश्न, भारत में सन्नाटा और सवाल
भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की घोषणा के बाद दोनों देशों की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग रही। पाकिस्तान में इसे बड़ी जीत के तौर पर मनाया गया, जबकि भारत में चुप्पी और चिंता का माहौल नजर आया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शनिवार शाम संघर्ष विराम की घोषणा के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने इसे “देश की जीत” करार दिया। अपने राष्ट्र के नाम संदेश में उन्होंने कहा, “हमने दुनिया को दिखा दिया कि पाकिस्तान एक खुद्दार और मजबूत कौम है। हमारी सेना ने दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया है।”
इसके विपरीत भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अब तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “भारत और पाकिस्तान ने गोलीबारी रोकने पर सहमति जताई है। लेकिन आतंकवाद पर हमारा रुख स्पष्ट और अटल रहेगा।”
पूर्व सेना प्रमुखों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। जनरल वेद प्रकाश मलिक ने कहा कि संघर्ष विराम के बाद यह सवाल उठेगा कि क्या भारत को कोई रणनीतिक लाभ मिला। जनरल मनोज नरवणे ने कहा, “यह तीसरी बार है जब ऐसा हुआ है, अब और मौका नहीं मिलना चाहिए।”
विपक्ष ने भी इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शांति का स्वागत किया लेकिन सवाल उठाया कि क्या सरकार हमलावरों को पकड़ने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। सचिन पायलट ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा संघर्ष विराम की घोषणा करना कश्मीर मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण है, जो चिंताजनक है।
हालांकि संघर्ष विराम की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही सीमा पर फिर से तनाव पैदा हो गया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने पाकिस्तान पर समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और कहा कि भारतीय सेना उचित जवाब दे रही है।




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