Highlights:
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – “ऊंची जाति के लोग बर्दाश्त नहीं कर पाए कि निचली जाति का व्यक्ति जज बन गया।”
जस्टिस सूर्यकांत ने जताई नाराजगी – “एक ईमानदार जज को सिर्फ जाति के आधार पर निशाना बनाया गया।”
प्रेम कुमार की बर्खास्तगी पर टिप्पणी – “अपराधी की शिकायत पर जज की निष्ठा पर सवाल उठाया गया।”
2025 में हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के आधार पर बर्खास्तगी को रद्द किया।
मामला अब सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन।
पूरा मामला:
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को न्यायपालिका में जाति आधारित भेदभाव पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जब एक निचली जाति से ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति जज बना, तो ऊंची जाति के लोग इसे सहन नहीं कर पाए।

जस्टिस सूर्यकांत की बेंच पंजाब के एडिशनल सेशन जज प्रेम कुमार की बर्खास्तगी के मामले में सुनवाई कर रही थी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह न्यायिक अधिकारी सिर्फ अपनी जाति के कारण निशाने पर है।
क्या है मामला?
2014 में प्रेम कुमार को अमृतसर जिला कोर्ट में एडिशनल जज नियुक्त किया गया था। एक दुष्कर्म के आरोपी ने शिकायत की कि वकालत के समय प्रेम कुमार ने पीड़िता से समझौते की कोशिश की थी। विजिलेंस जांच के बाद ईमानदारी पर सवाल उठाते हुए उन्हें 2022 में बर्खास्त कर दिया गया।
हालांकि 2025 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सबूतों की कमी के चलते बर्खास्तगी को रद्द कर दिया। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है, जहां न्यायपालिका के भीतर जातीय पक्षपात पर गंभीर बहस हो रही है।









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