Highlights:
केंद्र सरकार ने जातिगत जनगणना कराने की घोषणा की
जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, एआई और जियो-फेंसिंग का उपयोग
जनगणना अधिनियम 1948 के तहत कुछ प्रश्न अनिवार्य, कुछ वैकल्पिक
जाति बताना अनिवार्य है या नहीं, इस पर अभी तक कानून स्पष्ट नहीं
गलत जानकारी देने पर ₹1000 का जुर्माना लगाया जा सकता है
केंद्र सरकार ने देशभर में जातिगत जनगणना कराने का ऐलान किया है। इस जनगणना में हर नागरिक से उसकी जाति पूछी जाएगी। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति नहीं बताना चाहता तो क्या होगा? क्या जाति की जानकारी देना अनिवार्य है या वैकल्पिक?

जनगणना अधिनियम 1948 के तहत जनगणना कराई जाती है। इसमें कुछ सवालों का जवाब देना अनिवार्य होता है, जैसे आपकी उम्र, लिंग, शिक्षा, वैवाहिक स्थिति, व्यवसाय और निवास संबंधी जानकारी। इनका उत्तर न देने या गलत जानकारी देने पर ₹1000 का जुर्माना लगाया जा सकता है।
ये सवाल अनिवार्य होते हैं:
आपकी उम्र कितनी है?
आप पुरुष हैं या महिला?
आप विवाहित हैं या नहीं?
आपने कितनी शिक्षा प्राप्त की है?
आपका पेशा क्या है?
आप कहां रहते हैं और कितने समय से वहीं हैं?
ये सवाल वैकल्पिक होते हैं:
आपका धर्म क्या है?
आपकी राजनीतिक विचारधारा क्या है?
आपके स्वास्थ्य या विकलांगता से जुड़ी जानकारी
आपके आधार, पैन कार्ड जैसी व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी
अब तक केवल एससी और एसटी वर्गों से उनकी जाति पूछी जाती थी। लेकिन आगामी जनगणना में सभी वर्गों से जाति पूछी जाएगी। हालांकि, इसे अनिवार्य या वैकल्पिक बनाना है, इस पर कोई आधिकारिक कानून या अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जियो-फेंसिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम होगा और उप-श्रेणियों पर भी विचार चल रहा है।
इस तरह, जब तक सरकार इस संबंध में कोई स्पष्ट अधिसूचना या कानून नहीं लाती, तब तक जाति की जानकारी देना वैकल्पिक माना जा सकता है।









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