Highlights (मुख्य बिंदु):
भारत ने 1960 की सिंधु जल संधि को तत्काल प्रभाव से अस्थायी रूप से निलंबित किया
पाकिस्तान को सीमापार आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया
भारत ने कहा, अब जनसंख्या और जरूरतें बदल चुकी हैं, सिंधु जल संसाधनों का पूरा उपयोग जरूरी
इजरायली पीएम नेतन्याहू का समर्थन, भारत को आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता
भारत अब सीमित लेकिन निर्णायक और जिम्मेदार कार्रवाई पर केंद्रित रहेगा

2025 में 1960 वाली संधि नहीं चलेगी: भारत का पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
नई दिल्ली: भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 में हुई सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला लिया है। जलशक्ति मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी द्वारा भेजे गए पत्र में साफ कहा गया कि अब भारत को अपने जल संसाधनों का पूरा उपयोग करना होगा, क्योंकि जनसंख्या और जरूरतें 1960 के मुकाबले बहुत बदल चुकी हैं।
भारत ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि सीमापार आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर में अस्थिरता फैलाने की साजिशें अब और बर्दाश्त नहीं होंगी। भारत ने अनुच्छेद XII (3) के तहत संशोधन का प्रस्ताव दिया था, लेकिन पाकिस्तान ने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। इसी के बाद, भारत ने यह कड़ा कदम उठाया।
पहलगाम हमले में 26 भारतीय नागरिकों की मौत के बाद गुस्से में देश ने सख्त कार्रवाई की मांग की। इसी बीच, इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पीएम मोदी को फोन कर समर्थन जताया, जिससे भारत-इजरायल साझेदारी और मजबूत होती दिख रही है।
क्या भारत पाकिस्तान पर गाजा जैसा हमला करेगा?
भारत गाजा मॉडल के कुछ रणनीतिक पहलुओं पर जरूर विचार कर सकता है, लेकिन पूर्ण युद्ध की संभावना बेहद कम है। भारत की प्राथमिकता सीमित, सटीक सैन्य कार्रवाई, कूटनीतिक दबाव, और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने की होगी।

भारत के पास कौन-कौन से विकल्प हैं:
1. सर्जिकल स्ट्राइक और ड्रोन ऑपरेशन जैसे सीमित सैन्य विकल्प
2. परमाणु टकराव से बचाव की रणनीति
3. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का कूटनीतिक बहिष्कार
4. आर्थिक दबाव – सिंधु जल का पुनः नियंत्रण, अटारी सीमा बंद करना
5. मानवीय छवि बनाए रखना, जिससे भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा बनी रहे
निष्कर्ष:
भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ‘नई जनसंख्या, नई नीति’ के साथ आगे बढ़ा जाएगा। आतंक को समर्थन देने वाले देश को अब सिर्फ चेतावनी नहीं, कार्रवाई का सामना करना होगा।









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