Highlights:
जन्म के बाद कूड़ेदान में मिली, आज राजस्व सहायक पद पर कार्यरत
जन्म से दृष्टिहीन, फिर भी शिक्षा से बनाई पहचान
समाजसेवी शंकर बाबा पापलकर ने दी नई ज़िंदगी
एमपीएससी क्लर्क-कम-टाइपिस्ट परीक्षा पास कर रची सफलता की कहानी
अब नागपुर कलेक्टर कार्यालय में निभा रही हैं जिम्मेदारी

कूड़ेदान में मिली थी माला, आज सरकारी अफसर बनकर कर रहीं सेवा
कहते हैं, किस्मत भी उनका साथ देती है जो कभी हार नहीं मानते। माला पापलकर की कहानी कुछ ऐसी ही है। एक वक्त था जब उन्हें जन्म के कुछ ही समय बाद रेलवे स्टेशन के पास कूड़ेदान में फेंक दिया गया था। लेकिन आज वही माला नागपुर कलेक्टर कार्यालय में राजस्व सहायक के पद पर कार्यरत हैं। ये सफर न केवल संघर्षों से भरा रहा, बल्कि लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन गया है।
बचपन से अंधेरे में, लेकिन जीवन में उजाला भर दिया शिक्षा ने
माला जन्म से ही दृष्टिहीन थीं। जब वह नवजात थीं, तब पुलिस ने उन्हें जलगांव रेलवे स्टेशन के कूड़ेदान से रेस्क्यू किया। इसके बाद उन्हें बाल कल्याण समिति के माध्यम से अमरावती स्थित अनाथालय भेजा गया। वहीं, समाजसेवी शंकर बाबा पापलकर ने उन्हें गोद लिया, नाम दिया और उनकी परवरिश की ज़िम्मेदारी ली।
पढ़ाई बनी संबल
माला ने हार मानने के बजाय शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। उन्होंने डॉ. नरेंद्र भिवापुरकर अंध विद्यालय, अमरावती से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने विदर्भ ज्ञान विज्ञान संस्थान से कला संकाय में स्नातक और फिर पोस्ट ग्रेजुएशन किया। शिक्षा ने माला के लिए दुनिया के दरवाजे खोल दिए।
सरकारी नौकरी का सपना हुआ पूरा
मई 2023 में माला ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) द्वारा आयोजित क्लर्क-कम-टाइपिस्ट (ग्रुप C) परीक्षा पास की। कुछ तकनीकी कारणों से नियुक्ति में विलंब जरूर हुआ, लेकिन हाल ही में उन्हें नागपुर कलेक्टर कार्यालय में राजस्व सहायक के पद पर नियुक्त किया गया है। आज वह आत्मविश्वास के साथ अपनी नई ज़िम्मेदारी निभा रही हैं।
एक नई मिसाल
माला की कहानी उन सभी के लिए सबक है जो जीवन की कठिनाइयों से घबरा जाते हैं। उन्होंने दिखा दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर इरादा मजबूत हो तो मंज़िल जरूर मिलती है।









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