Highlights:
- बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे का बड़ा दावा – “CJI वांचू के पास नहीं थी कानून की डिग्री”
- 1967-68 में भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश रहे थे कैलाशनाथ वांचू
- वांचू भारतीय सिविल सेवा (ICS) के अधिकारी थे
- सुप्रीम कोर्ट में 355 फैसले दिए, कार्यकाल रहा मात्र 10 महीने
- विपक्ष ने दुबे के बयानों को लेकर जताई नाराजगी, बीजेपी ने बनाई दूरी

नई दिल्ली।
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट पर की गई टिप्पणी के बाद उन्होंने अब भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “क्या आपको पता है कि 1967-68 में भारत के मुख्य न्यायाधीश कैलाशनाथ वांचू जी ने कानून की कोई पढ़ाई नहीं की थी?”
उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष उन पर न्यायपालिका पर दबाव बनाने का आरोप लगा रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने खुद को इस बयान से अलग कर लिया है।
अब जानिए, आखिर कौन थे कैलाशनाथ वांचू?
बिना कानून की डिग्री, बन गए CJI
कैलाशनाथ वांचू का जन्म 1903 में मध्य प्रदेश में हुआ था। उन्होंने 1924 में भारतीय सिविल सेवा (ICS) परीक्षा पास की और यूनाइटेड किंगडम में ट्रेनिंग पूरी की। 1926 में वे सहायक मजिस्ट्रेट बने और बाद में रायबरेली के जिला न्यायाधीश के रूप में सेवा दी।
ICS ट्रेनिंग के दौरान उन्हें क्रिमिनल लॉ की शिक्षा दी गई थी, लेकिन औपचारिक कानून की डिग्री उनके पास नहीं थी।
न्यायिक करियर और CJI पद तक का सफर
1947 में वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के कार्यवाहक न्यायाधीश नियुक्त हुए। 1956 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
11 अप्रैल 1967 को तत्कालीन CJI के सुब्बाराव के इस्तीफे के बाद, 12 अप्रैल 1967 को कैलाशनाथ वांचू को भारत का 10वां Chief Justice of India नियुक्त किया गया।
उनका कार्यकाल सिर्फ 10 महीने रहा और 24 फरवरी 1968 को उन्होंने रिटायरमेंट लिया। इस दौरान उन्होंने 355 महत्वपूर्ण फैसले दिए।
उनके बाद जस्टिस मोहम्मद हिदायतुल्लाह देश के CJI बने।









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