हाइलाइट शब्द (Highlight Words):
वक्फ कानून, पीएम मोदी, तुष्टिकरण नीति, बंटवारा, सामाजिक न्याय
Article (BETULHUB Style):
PM मोदी ने वक्फ संशोधन कानून 2025 पर विपक्ष को घेरा, बंटवारे से जोड़ा तुष्टिकरण का मुद्दा
नई दिल्ली। वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 (Waqf Amendment Act 2025) को लेकर देश में सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को पारदर्शिता और सामाजिक न्याय की दिशा में बड़ा कदम बताया है, जबकि विपक्ष इसे मुस्लिम विरोधी बता रहा है। अब पीएम मोदी ने कांग्रेस की तुष्टिकरण नीति और देश के बंटवारे का जिक्र कर इस बहस को नया मोड़ दे दिया है।

बंटवारे का जिक्र क्यों किया पीएम मोदी ने?
PM मोदी ने News18 Rising Bharat Summit में कहा कि बंटवारा आम मुसलमानों की इच्छा नहीं थी, बल्कि कांग्रेस के समर्थन से कुछ कट्टरपंथियों की साजिश थी। उन्होंने साफ किया कि वक्फ कानून को लेकर विपक्ष का विरोध उसी तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा है, जिसने पहले भी देश को नुकसान पहुंचाया।
2013 के वक्फ कानून पर सवाल
पीएम मोदी ने 2013 में कांग्रेस सरकार द्वारा लाए गए वक्फ कानून को कट्टरपंथियों और जमीन माफिया को खुश करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि उस कानून ने आम लोगों की जमीन पर खतरा पैदा कर दिया था। उदाहरण के तौर पर केरल में ईसाई समुदाय की जमीन, हरियाणा में गुरुद्वारों की जमीन, और कर्नाटक में किसानों की जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावों का जिक्र किया गया।
नया कानून और पारदर्शिता का वादा
प्रधानमंत्री ने कहा कि नया वक्फ कानून आम मुसलमानों, महिलाओं और बच्चों के हितों की रक्षा करेगा। अब एक नोटिस पर जमीन वक्फ संपत्ति नहीं बन सकेगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और गरीब मुसलमानों को न्याय मिलेगा।
विपक्ष की चिंता बढ़ी
विपक्ष इस कानून को मुस्लिम विरोधी बताकर जनता में ले जाने की रणनीति बना रहा है। लेकिन पीएम मोदी ने इसे जनभागीदारी वाला लोकतांत्रिक कदम बताते हुए विपक्ष की रणनीति पर पानी फेर दिया। उन्होंने बताया कि इस कानून पर 16 घंटे की बहस, 38 JPC मीटिंग्स, और 1 करोड़ से अधिक सुझाव लिए गए।

पीएम की रणनीति के 3 मकसद:
1. विपक्ष को घेरना – कांग्रेस की पुरानी नीतियों और तुष्टिकरण को कटघरे में खड़ा करना।
2. मुस्लिम समुदाय को संदेश देना – यह कानून आम और पिछड़े मुसलमानों के हित में है।
3. सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना – तुष्टिकरण नहीं, हर वर्ग के लिए समान न्याय।









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