रामनवमी पर भारत को मिलेगा नया उपहार – पंबन ब्रिज, जो देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे पुल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 अप्रैल को रामेश्वरम में इस ऐतिहासिक पुल का उद्घाटन करेंगे। इसके बाद वे रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना भी करेंगे। इस मौके पर वे तमिलनाडु में 8,300 करोड़ रुपये की विभिन्न रेल और सड़क परियोजनाओं की आधारशिला भी रखेंगे।
क्यों खास है पंबन ब्रिज?
भारत का यह पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज पाक जलसंधि पर बना है, जिसकी लंबाई 2.07 किलोमीटर है। यह रामेश्वरम द्वीप को भारतीय मुख्य भूमि से जोड़ता है और बेहतर कनेक्टिविटी का मार्ग प्रशस्त करता है।
पुराने पुल से नए पुल तक की यात्रा
1914 में बना पुराना पंबन ब्रिज एक कैंटिलीवर संरचना थी, जो समय के साथ समुद्री पर्यावरण से क्षतिग्रस्त हो गई और आधुनिक ट्रैफिक की आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पा रही थी। केंद्र सरकार ने 2019 में नए ब्रिज के निर्माण को मंजूरी दी।

पंबन ब्रिज की प्रमुख विशेषताएं
- 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन – यह 17 मीटर तक ऊपर उठ सकता है, जिससे बड़े जहाज आसानी से गुजर सकें।
- 3 मीटर ऊंचाई में इजाफा – समुद्री मार्ग से कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा।
- स्टेनलेस स्टील और एंटी-कोरोसिव कोटिंग – लंबी उम्र और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए।
- डुअल ट्रैक डिज़ाइन – दोहरी पटरियों के साथ तेज़ और भारी रेल यातायात को सपोर्ट करता है।
निर्माण में अपनाई गई आधुनिक तकनीक
- हाइड्रोलिक जैकिंग और ऑटो लॉन्चिंग विधि से किया गया लिफ्ट स्पैन का इंस्टॉलेशन।
- समुद्री वातावरण को सहन करने के लिए एंटी-कोरोसिव तकनीक का उपयोग।
- निर्माण के दौरान तूफान, चक्रवात और भूकंपीय गतिविधियों जैसी कई चुनौतियों का सामना किया गया।
इस ब्रिज की ज़रूरत क्यों थी?
- पुराना पुल ट्रैफिक और तेज़ रफ्तार ट्रेनों को सपोर्ट करने में असमर्थ था।
- नया ब्रिज आधुनिक इंजीनियरिंग के मानकों पर खरा उतरता है।
- रेल और समुद्री मार्ग दोनों के लिए होगा अधिक सुरक्षित और सुगम।
गौरव की बात – भारतीय इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण
पंबन ब्रिज अब गोल्डन गेट, ओरेसुंड ब्रिज और टावर ब्रिज जैसे वैश्विक पुलों की सूची में शुमार हो गया है। इसका अनुमानित जीवनकाल 100 साल से अधिक है, जो भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर शक्ति और इंजीनियरिंग कौशल का प्रमाण है।









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