ट्रंप के ‘जवाबी टैरिफ’ पर भारत की सूझबूझ, चार रणनीतियों के साथ पूरी तैयारी
नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘जवाबी टैरिफ’ (Retaliatory Tariff) को लेकर भारत ने संतुलित और सूझबूझ भरी रणनीति अपनाई है। भारत किसी भी व्यापारिक कदम का मूल्यांकन केवल आयात शुल्क (Import Tariff) के आधार पर नहीं, बल्कि व्यापक सहयोग (Bilateral Cooperation) के नजरिए से करता है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा 2 अप्रैल को घोषित किए जाने वाले ‘मुक्ति दिवस टैरिफ’ (Liberation Day Tariff) को लेकर पूरी दुनिया में व्यापार जगत में हलचल है। हालांकि, भारत इस मामले में जल्दबाजी नहीं दिखा रहा है, बल्कि ‘रुको और देखो’ (Wait and Watch) नीति पर काम कर रहा है।

चार संभावित परिस्थितियों के लिए भारत तैयार
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, सरकार चार संभावित परिस्थितियों और उनके भारतीय व्यापार पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण कर चुकी है:
- यदि यह टैरिफ उत्पाद-विशेष (Product-Specific) होगा: तो इसका असर मुख्य रूप से चीन, मैक्सिको, कनाडा और यूरोपीय संघ पर पड़ेगा, जिससे भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ (Competitive Advantage) मिल सकता है।
- यदि यह टैरिफ क्षेत्र-विशेष (Sector-Specific) होगा: तो वैश्विक स्तर पर सभी देशों को अतिरिक्त लागत (Additional Cost) और लाभ में कटौती (Reduction in Profit) का सामना करना पड़ेगा।
- यदि यह टैरिफ किसी विशेष देश पर केंद्रित होगा: तो भारत को भी नकारात्मक प्रभाव झेलना पड़ सकता है।
- यदि यह द्वितीयक शुल्क (Secondary Tariff) के रूप में आता है: तो भारतीय निर्यात को बड़ा झटका लग सकता है।
भारत का संतुलित दृष्टिकोण और व्यापार नीति
भारत के व्यापारिक संबंधों (Trade Relations) में पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका के साथ महत्वपूर्ण प्रगति (Significant Progress) हुई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) का मूल्यांकन केवल शुल्क दरों (Tariff Rates) से नहीं, बल्कि परस्पर सहयोग (Mutual Cooperation) से किया जाता है।”
अमेरिका की नीति और संभावित प्रभाव
अमेरिका में व्हाइट हाउस प्रशासन (White House Administration) ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें भारत समेत अमेरिका के व्यापारिक साझेदार देशों की टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं (Tariff and Non-Tariff Barriers) का विश्लेषण किया गया है। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत ने घोषणा की है कि वह अपने आयात शुल्क (Import Duties) को बहुत अधिक घटाने जा रहा है।”
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता और भविष्य की रणनीति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच 13 फरवरी को हुई बैठक में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर (Mission 500) तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी स्पष्ट किया कि भारत की टैरिफ नीति (Tariff Policy) का उद्देश्य व्यापार संतुलन (Trade Balance) बनाए रखना और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा (Protection of Domestic Industries) करना है।
अन्य देशों की प्रतिक्रिया
जहां भारत सतर्क नीति (Cautious Policy) अपना रहा है, वहीं यूरोपीय संघ (European Union) ने मजबूत जवाबी कदम (Strong Retaliatory Measures) तैयार किए हैं। ब्रिटेन भी अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास में है। एशियाई देशों चीन, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी आपूर्ति श्रृंखला सहयोग (Supply Chain Cooperation) को मजबूत करने के लिए नई वार्ताएं शुरू की हैं।
भारत की रणनीति: जल्दबाजी नहीं, स्थायी समाधान की ओर
भारत ने अमेरिका के ‘जवाबी टैरिफ’ को लेकर कोई हड़बड़ी नहीं (No Hasty Decision) दिखाई है और स्थिति का पूरी तरह से विश्लेषण (Analysis) करने के बाद ही प्रतिक्रिया देने की योजना बनाई है। भारत की रणनीति द्विपक्षीय व्यापार वार्ता (Bilateral Trade Talks) के जरिए स्थायी समाधान (Long-Term Solution) निकालने की है, जिससे अमेरिकी नीति का दीर्घकालिक प्रभाव कम किया जा सके।









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