Highlighted Words: म्यांमार भूकंप, सेना की बमबारी, गृहयुद्ध, लोकतंत्र समर्थक, अंतरराष्ट्रीय मदद
म्यांमार में भूकंप से तबाही के बीच सेना की बमबारी, नागरिकों की मौत पर बढ़ा आक्रोश
म्यांमार में 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भयानक तबाही मचाई है। मांडले सिटी समेत कई इलाकों में मलबे के ढेर लगे हैं, और हजारों लोग अपनों को खो चुके हैं। यूनाइटेड स्टेट जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के अनुसार, मृतकों की संख्या 10,000 के पार जा सकती है, जबकि विभिन्न एजेंसियों के अनुसार यह आंकड़ा 2,000 से अधिक हो चुका है।
हालांकि, इस त्रासदी के बीच म्यांमार की सैन्य सरकार (जुंटा) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राहत कार्यों की बजाय सेना ने भूकंप प्रभावित इलाकों पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं, जिससे और भी निर्दोष नागरिकों की मौत हो रही है।

गृहयुद्ध के बीच लोकतंत्र समर्थकों पर हमले
म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद से गृहयुद्ध जारी है। लोकतंत्र समर्थकों ने हाल ही में एकतरफा सीजफायर का ऐलान किया था, लेकिन जुंटा ने इसे नजरअंदाज कर हवाई हमले तेज कर दिए। विद्रोही संगठनों के कब्जे वाले इलाकों को निशाना बनाया जा रहा है, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
भारत समेत कई देशों की मदद, लेकिन सेना का असहयोग
भूकंप के बाद कई देश म्यांमार की मदद के लिए आगे आए हैं। भारत ने “ऑपरेशन ब्रह्मा” के तहत राहत सामग्री भेजी है, जबकि रूस और चीन भी सहायता दे रहे हैं। हालांकि, जुंटा सरकार लोगों की मदद करने के बजाय विद्रोहियों पर हमले करने में व्यस्त है।
संयुक्त राष्ट्र की निंदा, वैश्विक आक्रोश
संयुक्त राष्ट्र (UN) ने म्यांमार की सेना के हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे “अमानवीय और अस्वीकार्य” करार दिया है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, शान राज्य के नौंगचो में हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जुंटा इस मौके का फायदा उठाकर उन क्षेत्रों को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहती है, जो उसने पहले खो दिए थे। लेकिन इस निर्दयी कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय आक्रोश को भड़का दिया है, जिससे म्यांमार पर कूटनीतिक दबाव बढ़ सकता है।









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