Highlighted Words: हाईकोर्ट बार, जस्टिस यशवंत वर्मा, कार्य बहिष्कार, कानून मंत्रालय, अधिवक्ताओं की बैठक
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने किया जस्टिस यशवंत वर्मा के शपथ ग्रहण का बहिष्कार
प्रयागराज। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित होकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में नियुक्त हुए जस्टिस यशवंत वर्मा के शपथ ग्रहण समारोह का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। बार एसोसिएशन के वकीलों ने कहा कि जिस न्यायाधीश ने दिल्ली में न्यायिक मूल्यों को ठेस पहुंचाई, वह यहां शपथ कैसे ले सकता है।
हाईकोर्ट बार अध्यक्ष अनिल तिवारी ने इसे भारतीय न्यायपालिका के इतिहास का “सबसे काला दिन” बताया। इसके साथ ही, फोटो एफिडेविट सेंटर को पुनः खोलने और आंदोलन की आगे की रणनीति तय करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ताओं की बैठक बुलाई गई है।

आधी रात तक चली आपात बैठक, वकीलों का रोष चरम पर
यह निर्णय बार अध्यक्ष अनिल तिवारी के आवास पर रात 12:30 बजे तक चली आपात बैठक में लिया गया। बैठक में उपाध्यक्ष अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी और जूनियर धर्मेंद्र शुक्ल सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता उपस्थित रहे। वकीलों का कहना है कि कानून मंत्रालय द्वारा स्थानांतरण की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही विरोध और तेज हो गया है।
कोर्ट कार्यवाही ठप, वादकारियों को करना पड़ा इंतजार
लगातार चौथे दिन कार्य बहिष्कार के चलते इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायिक कार्य प्रभावित हुआ। न्यायाधीश कोर्ट कक्ष में पहुंचे, लेकिन वकीलों के बहिष्कार के चलते वे कुछ ही देर में अपने चैंबरों में लौट गए। इससे दूर-दराज से आए वादकारी निराश लौटने को मजबूर हुए।
चार प्रमुख मांगों पर प्रस्ताव पास
हाईकोर्ट बार के वकीलों ने कैश कांड में विवादित जस्टिस यशवंत वर्मा के स्थानांतरण को रद्द करने सहित चार प्रमुख मांगों पर प्रस्ताव पारित किया:
- जस्टिस वर्मा का स्थानांतरण निरस्त किया जाए।
- हाईकोर्ट में जजों के रिश्तेदारों की वकालत पर रोक लगे।
- केस लिस्टिंग की समस्या का समाधान हो।
- पहले दाखिल मुकदमों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाए।
आंदोलन की अगली रणनीति पर जल्द होगा फैसला
शाम को हाईकोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि आंदोलन को और तेज करने के लिए आगे की रणनीति तय की जाएगी। इस दौरान गेट नंबर तीन के बाहर अधिवक्ताओं ने सभा आयोजित की, जिसमें वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजेश खरे, महासचिव विक्रांत पांडेय, और उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र सहित कई प्रमुख अधिवक्ताओं ने अपनी बात रखी।
निष्कर्ष:
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की है। वकीलों का यह विरोध आंदोलन कितना लंबा चलेगा, यह आगामी बैठकों में तय होगा।









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