Highlighted Words:
जस्टिस राम मनोहर मिश्र, इलाहाबाद हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, विवादित फैसला, बलात्कार का प्रयास
☀️Article:
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र का एक हालिया फैसला विवादों में आ गया है। उन्होंने 17 मार्च को दिए अपने आदेश में कहा कि स्तनों को पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना बलात्कार के प्रयास के दायरे में नहीं आता। इस फैसले की कड़ी आलोचना हुई, और सुप्रीम कोर्ट ने इसे “निर्मम” व “संवेदनहीन” करार दिया।

➡️ सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को कानूनी मानकों के खिलाफ बताया और इसे तत्काल रोक दिया। कोर्ट ने कहा कि चार महीने तक विचार करने के बाद भी ऐसा असंवेदनशील फैसला सुनाया गया, जिससे न्यायाधीश की सोच पर सवाल उठते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ‘वी द विमेन ऑफ इंडिया’ संगठन की याचिका पर स्वतः संज्ञान लिया और इस फैसले की कड़ी आलोचना की।
➡️ कौन हैं जस्टिस राम मनोहर मिश्र?
जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्र वर्तमान में इलाहाबाद हाई कोर्ट में बलरामपुर जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 1985 में कानून की डिग्री प्राप्त की और 1990 में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा से करियर की शुरुआत की। बाद में, 2005 में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति मिली।
2019 में उन्होंने बागपत और अलीगढ़ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में कार्य किया। इसके अलावा, वह लखनऊ स्थित न्यायिक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान के निदेशक भी रहे। 15 अगस्त 2022 को उन्हें अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया, और सितंबर 2023 में स्थायी न्यायाधीश बने।
➡️ क्या होगा आगे?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे संवेदनहीन फैसलों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन गया है और महिला अधिकार संगठनों ने भी इस पर नाराजगी जताई है।




Leave a Reply