संभल प्रशासन ने अलविदा जुमा और ईदगाह की नमाज को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है। सड़कों और छतों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी, और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी पाबंदी होगी। यह फैसला शांति समिति की बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

प्रशासन की गाइडलाइन
संभल की एसडीएम डॉ. वंदना मिश्रा ने बताया कि बैठक का उद्देश्य त्योहारों को शांति और सौहार्द के साथ मनाने का था। उन्होंने कहा,
“नवरात्रि और ईद के मद्देनजर बैठक हुई। इसमें साफ कर दिया गया कि सड़कों पर नमाज नहीं होगी और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी रोक रहेगी। छत पर नमाज की अनुमति जांच के बाद दी जाएगी।”
सपा सांसद ने जताई नाराजगी
समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर रहमान बर्क ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा,
“छत कोई सरकारी जगह नहीं होती, यह निजी संपत्ति होती है। अगर कोई अपने घर पर भी इबादत नहीं करेगा, तो फिर कहां करेगा? यह संविधान द्वारा दिए गए धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों का हनन है।”
सीओ संभल का बयान भी चर्चा में
इससे पहले सीओ अनुज चौधरी का एक बयान होली के दौरान चर्चा में था। उन्होंने कहा था,
“होली साल में एक बार आती है, जबकि जुमा 52 बार आता है।”
अब उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने सभी धर्मों के लिए समान रूप से बात की थी और अगर किसी को आपत्ति थी, तो उसे हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था।
निष्कर्ष
संभल प्रशासन के इस फैसले को लेकर मजहबी आजादी और कानून व्यवस्था के बीच बहस छिड़ गई है। सरकार की सख्ती पर जहां कुछ लोग सहमति जता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे धार्मिक आजादी का हनन बता रहा है।









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