🔵 इलाहाबाद हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, विवादित आदेश, संवेदनशीलता की कमी, बलात्कार

👉 सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के विवादित आदेश पर लगाई रोक, संवेदनशीलता की कमी पर जताई नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें कहा गया था कि ‘ब्रेस्ट पकड़ना’ और ‘पजामे का नाड़ा तोड़ना’ बलात्कार या बलात्कार का प्रयास नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को संवेदनहीन करार देते हुए कुछ हिस्सों पर तत्काल रोक लगा दी है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस भूषण आर गवई ने कहा,
“हमें खेद है कि एक जज ने इतने कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया। यह आदेश संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी दर्शाता है।”
🟩 सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी
📌सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को गंभीर रूप से त्रुटिपूर्ण बताया।
📌फैसले के पैराग्राफ 24, 25 और 26 में न्यायाधीश की संवेदनहीनता साफ झलकती है।
📌अदालत ने यह भी माना कि निर्णय देने में देरी (4 महीने) से भी मामला और पेचीदा हो गया।
🟪 पीड़िता की मां की याचिका पर भी सुनवाई होगी
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि पीड़िता की मां द्वारा दायर याचिका को भी इस मामले से जोड़ा जाए, ताकि दोनों पर एक साथ सुनवाई हो सके।
यह मामला महिला सुरक्षा और न्यायपालिका की संवेदनशीलता से जुड़ा होने के कारण पूरे देश में चर्चा और आक्रोश का विषय बन गया है। सुप्रीम कोर्ट के इस हस्तक्षेप से उम्मीद है कि पीड़िता को न्याय मिलेगा और ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बनाए रखने का संदेश दिया जाएगा।




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