बैतूल के भारत भारती आवासीय सीबीएसई स्कूल में इस साल भी होली का त्योहार प्राकृतिक तरीके से मनाया गया। छात्रों ने रासायनिक रंगों से बचने के लिए खुद प्राकृतिक रंग तैयार किए और उन्हीं से होली खेली। इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देना था।

फूलों और पत्तियों से बनाए रंग
छात्रों ने पलाश, चुकंदर और गेंदा के फूलों से रंग बनाए। पलाश के फूलों को उबालकर नारंगी रंग, जबकि पालक और चुकंदर को सुखाकर गुलाल तैयार किया गया। इस प्रक्रिया में शिक्षकों ने भी सहयोग किया।

रासायनिक रंगों से बचने की सीख

विद्यालय के प्रधानाचार्य जितेंद्र परसाई ने बताया कि रासायनिक रंग त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक होते हैं, इसलिए स्कूल में हर साल प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग किया जाता है। इस पहल से छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्होंने नए कौशल भी सीखे।

विद्यालय का यह प्रयास स्वस्थ और टिकाऊ जीवनशैली को बढ़ावा देता है। छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि प्राकृतिक संसाधनों से कैसे पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाए जा सकते हैं।









Leave a Reply