दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बारे में भाजपा और कांग्रेस का कहना है कि वे चुनाव जीतने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। इस पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री और विधायक आतिशी ने स्पष्टीकरण दिया है कि अगर आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करती है, तो अरविंद केजरीवाल पुनः मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
आतिशी ने कहा कि संविधान और चुनावी प्रक्रिया के तहत, यदि किसी पार्टी को बहुमत मिलता है, तो पार्टी का नेता मुख्यमंत्री पद के लिए चुना जाता है। उन्होंने यह भी बताया कि दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी के पास पर्याप्त संख्या बल होने पर अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री पद के लिए फिर से चुने जाएंगे, क्योंकि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के अनुसार होगा।
दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सियासी माहौल गर्मा गया है। भाजपा और कांग्रेस लगातार दावा कर रही हैं कि अरविंद केजरीवाल चुनाव जीतने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बन सकते, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देते वक्त कुछ शर्तें लगाई थीं। इन शर्तों का हवाला देते हुए विपक्षी दल कह रहे हैं कि इन शर्तों के कारण केजरीवाल मुख्यमंत्री बनने में अयोग्य हो सकते हैं।
इस बीच, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और मंत्री आतिशी ने स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने बताया कि चुनाव जीतने के बाद केजरीवाल को दोबारा मुख्यमंत्री बनने का पूरा अधिकार है। आतिशी ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई शर्तों का मुख्यमंत्री बनने पर कोई असर नहीं होगा, और पार्टी पूरी तरह से इस मुद्दे पर आश्वस्त है।
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ इंटरव्यू में कालकाजी से आप उम्मीदवार आतिशी ने स्पष्ट किया कि अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री बनने का अधिकार कानूनी रूप से पूरी तरह से वैध है। उन्होंने कहा, “जो कोई भी चुनाव लड़ सकता है, वह सीएम बनने के योग्य है, और इसलिए इसकी वैधता बिल्कुल स्पष्ट है।”
यह बयान उस समय आया है जब पिछले साल सितंबर में अरविंद केजरीवाल ने कथित शराब घोटाले मामले में जमानत मिलने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उन्होंने यह कसम खाई थी कि वह विधानसभा चुनाव के बाद फिर से मुख्यमंत्री पद पर लौटेंगे, जब दिल्ली की जनता उन्हें ‘ईमानदारी का प्रमाण पत्र’ देगी।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पिछले दस सालों से आम आदमी पार्टी (AAP) ने हमेशा किसी न किसी शर्त के तहत अपनी सरकार चलाई है। उन्होंने 2015 का उदाहरण देते हुए कहा कि, “हम फरवरी 2015 में दिल्ली की सत्ता में आए, लेकिन मई 2015 में गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना जारी कर अवैध रूप से दिल्ली सरकार की सारी शक्तियां छीन लीं।” केजरीवाल ने बताया कि इसके खिलाफ उनकी सरकार ने आठ साल तक अदालत में संघर्ष किया और अंततः वे सही साबित हुए। हालांकि, इसके बाद भी, आठ दिन के भीतर केंद्र सरकार ने एक नया अध्यादेश लागू कर दिया, जिसने फिर से दिल्ली सरकार की सारी शक्तियां छीन लीं।
आतिशी ने कहा कि आम आदमी पार्टी (AAP) और अरविंद केजरीवाल ने तमाम “शर्तों” के बावजूद एक सफल जनहितैषी सरकार चलाई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन पर (केजरीवाल) शर्तें थोपना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि पार्टी ने हमेशा चुनौतियों का सामना किया है और जनता के लिए काम किया है।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के संदर्भ में, पांच फरवरी को एक चरण में मतदान होगा, और आठ फरवरी को मतों की गिनती होगी। इसी दिन यह तय हो जाएगा कि दिल्ली की सत्ता अगले पांच साल के लिए किस पार्टी के पास होगी।









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