- राष्ट्रपति भवन में होने वाला ‘लेटर ऑफ क्रेडेंस’ समारोह अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
- तुर्की, थाईलैंड, बांग्लादेश सहित 5 देशों के राजनयिक सौंपने वाले थे परिचय पत्र
- बीसीएएस ने तुर्की की सेलेबी कंपनी की सुरक्षा मंजूरी की रद्द
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में तुर्की के पाकिस्तान समर्थन पर भारत गंभीर
- MEA ने स्थगन का कारण ‘कार्यक्रम संबंधी समस्याएं’ बताया, पर विशेषज्ञों ने कूटनीतिक संकेत माना
नई दिल्ली: भारत और तुर्की के बीच कूटनीतिक संबंधों में बढ़ते तनाव की झलक गुरुवार को उस समय देखने को मिली जब विदेश मंत्रालय (MEA) ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले ‘लेटर ऑफ क्रेडेंस’ समारोह को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। इस कार्यक्रम में तुर्की के नवनियुक्त राजदूत अली मुरात एरसोय, थाईलैंड की राजदूत चावनार्ट थंगसुमफन्ट, बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्ला, कोस्टा रिका और सेंट किट्स के प्रतिनिधियों को अपने राजनयिक मान्यता पत्र प्रस्तुत करने थे।

विदेश मंत्रालय ने बयान में कहा, “राष्ट्रपति भवन में आज (गुरुवार) होने वाला परिचय पत्र समारोह कार्यक्रम संबंधी समस्याओं के कारण स्थगित कर दिया गया है।” हालांकि इसमें यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह स्थगन तुर्की को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताओं से जुड़ा है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यह समारोह शाम 4 बजे निर्धारित था। वहीं, नई दिल्ली स्थित थाई दूतावास और बांग्लादेश उच्चायोग ने भी इस कार्यक्रम के स्थगन की पुष्टि की है।
इस फैसले से कुछ ही दिन पहले भारत की विमानन सुरक्षा एजेंसी BCAS ने तुर्की की सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज इंडिया की सुरक्षा मंजूरी तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी थी। यह कदम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की के पाकिस्तान के प्रति कूटनीतिक और रक्षा सहयोग के मद्देनज़र उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का अचानक स्थगन केवल शेड्यूलिंग इश्यू नहीं हो सकता, बल्कि यह एक स्पष्ट कूटनीतिक संदेश हो सकता है।
पिछले महीने ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पनामा, सूडान, गुयाना, डेनमार्क और फलस्तीन के राजनयिकों से उनके लेटर ऑफ़ क्रेडेंस स्वीकार किए थे, जिससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा स्थगन की वजह राजनीतिक और कूटनीतिक हो सकती है।









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