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ऑपरेशन सिंदूर, भारत की सैन्य ताकत, चीन बाहर, तुर्की का बहिष्कार, कूटनीतिक संदेश
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने दुनिया को दिखाया दम, चीन को किया बाहर, तुर्की ने खुद बनाई दूरी
नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद भारत ने अब कूटनीतिक मोर्चे पर भी स्पष्ट कर दिया है कि कौन उसका वास्तविक मित्र है और कौन छलावा करता है। पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कार्रवाई के बाद भारत ने 70 देशों के डिफेंस अटैशे को एक ब्रीफिंग के लिए आमंत्रित किया—लेकिन चीन को जानबूझकर इस लिस्ट से बाहर रखा गया। वहीं, तुर्की को निमंत्रण भेजा गया लेकिन उसने शामिल होना जरूरी नहीं समझा।

भारत का सख्त संदेश: जो हमारे साथ नहीं, वह विरोध में है
पाकिस्तान के सदाबहार सहयोगी चीन को इस ब्रीफिंग से बाहर कर भारत ने यह संदेश दिया कि जो भारत की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है या उसके दुश्मनों का साथ देता है, उसे भरोसे में लेना रणनीतिक रूप से अनुचित होगा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने जिस तरह पाकिस्तानी सीमा में चीन निर्मित एयर डिफेंस सिस्टम को नष्ट किया, उसकी जानकारी चीन को नहीं देना ही समझदारी थी।
तुर्की पर भी भारत ने लिया कड़ा रुख
तुर्की को आमंत्रण भेजा गया था, लेकिन उसने उच्च प्रतिनिधि भेजने से इनकार कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, तुर्की ने एक जूनियर अधिकारी को भेजने की बात कही थी, जिसे भारत ने अस्वीकार कर दिया। भारत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कोई औपचारिकता नहीं, बल्कि रणनीतिक संवाद है।
ब्रीफिंग में क्या बताया गया?
इस खास बैठक में लेफ्टिनेंट जनरल डीएस राणा ने ऑपरेशन सिंदूर की पूरी रणनीति और सफलता साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे सेना, वायुसेना, नौसेना, साइबर, स्पेस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की संयुक्त ताकत से पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों को खत्म किया गया। यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत का निशाना केवल आतंकवाद था, आम नागरिक नहीं।
पाकिस्तान के झूठ को किया बेनकाब
भारत ने इस ब्रीफिंग में यह भी बताया कि कैसे पाकिस्तान वैश्विक मंच पर झूठा प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन भारत ने सटीक तथ्यों और सूचना युद्ध में उसे पीछे छोड़ दिया।
भारत की नई रणनीति: अपने हितों के अनुसार तय करेगा संबंध
इस पूरी प्रक्रिया ने यह साफ कर दिया कि भारत अब सिर्फ सीमाओं पर नहीं, डिप्लोमैटिक लेवल पर भी अपने हितों के आधार पर फैसले ले रहा है। चीन को दूर रखना और तुर्की के रुख पर सख्त रहना भारत की नई विदेश नीति का हिस्सा है, जिसमें रिश्तों की कसौटी अब सिर्फ मित्रता नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक प्राथमिकताएं हैं।









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