- हार्ट अटैक से पहले शरीर देता है कई चेतावनी संकेत
- शुरुआती 60 मिनट को कहा जाता है गोल्डन आवर
- एस्पिरिन और नाइट्रोग्लिसरीन दवा दे सकती हैं राहत
- सीपीआर से बचाई जा सकती है जिंदगी
- युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहे हार्ट अटैक के केस
हार्ट अटैक अब केवल उम्रदराज़ लोगों की बीमारी नहीं रह गई है। आज के समय में यह युवाओं को भी तेजी से अपना शिकार बना रही है। इंडियन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, हर साल भारत में लगभग 20 लाख लोग हार्ट डिजीज की चपेट में आ जाते हैं।
इसका प्रमुख कारण है – अनहेल्दी लाइफस्टाइल, खान-पान और तनाव। लेकिन राहत की बात ये है कि हार्ट अटैक से पहले शरीर कुछ चेतावनी संकेत देता है, जिन्हें समय रहते पहचानकर हम जान बचा सकते हैं।

हार्ट अटैक के शुरुआती लक्षण क्या होते हैं?
डॉक्टरों और WHO तथा American Heart Association के अनुसार, हार्ट अटैक का सबसे आम लक्षण होता है –
- सीने के बीच में दबाव, भारीपन या जलन
- बाई बांह, कंधे, जबड़े या पीठ में अचानक दर्द
- बिना मेहनत किए सांस फूलना
- पैरों या टखनों में सूजन
- रात में बार-बार नींद खुलना या उल्टी जैसा महसूस होना
इन लक्षणों को नजरअंदाज करना घातक हो सकता है।
हार्ट अटैक से जान कैसे बचाएं?
गोल्डन आवर यानी हार्ट अटैक के बाद के शुरुआती 60 मिनट में इलाज मिल जाए तो 90% तक जान बचने की संभावना होती है। ऐसे में ये कदम बेहद जरूरी हैं:
- इमरजेंसी नंबर पर तुरंत कॉल करें
- अगर अकेले हैं, पड़ोसी या किसी करीबी को खबर दें
- गाड़ी खुद न चलाएं
एस्पिरिन और नाइट्रोग्लिसरीन का इस्तेमाल कैसे करें?
- 300mg एस्पिरिन की टैबलेट हार्ट अटैक के दौरान ब्लड क्लॉट बनने से रोक सकती है, लेकिन इसे तभी लें जब डॉक्टर ने पहले अनुमति दी हो और कोई एलर्जी न हो।
- नाइट्रोग्लिसरीन, जो दिल तक ब्लड फ्लो बढ़ाता है, केवल हार्ट पेशेंट्स ही डॉक्टर की सलाह से लें।
सीपीआर से कैसे बचाई जा सकती है जान?
अगर कोई व्यक्ति बेहोश हो गया है और सांस नहीं ले रहा, तो CPR (Cardiopulmonary Resuscitation) तुरंत शुरू करें।
- हाथों से सीने के बीच हिस्से को 100 से 120 बार प्रति मिनट की गति से दबाएं।
- इससे ब्लड फ्लो बना रहता है और जान बच सकती है।




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