पाकिस्तान की परमाणु धमकी से दहला अमेरिका, जयशंकर को कॉल कर युद्धविराम की पहल!
नई दिल्ली/इस्लामाबाद: भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ परमाणु युद्ध की धमकी देकर अमेरिका पर दबाव बनाया, जिसके चलते अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से आपात संपर्क किया। इसके कुछ घंटों बाद ही दोनों देशों ने सीजफायर की घोषणा कर दी।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारत ने पाकिस्तान के आतंकी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे पाकिस्तान में हलचल मच गई। जवाब में पाकिस्तान ने नेशनल कमांड अथॉरिटी की आपात बैठक बुलाई, जो परमाणु हथियारों की निगरानी करती है।

‘परमाणु बटन दबा देंगे’ की खुली धमकी
सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिकी सीनेटर से बातचीत में कहा, “अगर हालात नहीं बदले तो हम परमाणु बटन दबा देंगे।” यह धमकी कोई सामान्य बात नहीं थी, बल्कि एक रणनीतिक दांव था जिससे अमेरिका को हस्तक्षेप के लिए मजबूर किया गया।
पाक अधिकारी का कबूलनामा
एक वरिष्ठ पाक अधिकारी ने पत्रकारों से बातचीत में खुलकर स्वीकार किया कि उन्होंने अमेरिका को धमकाया था। उन्होंने कहा, “दो परमाणु देशों के बीच युद्ध विनाशकारी होगा, इसलिए यह रणनीति अपनाई गई।”
अमेरिका ने तुरंत एक्शन लिया
अमेरिका को जब परमाणु टकराव का खतरा नजर आने लगा, तो उसने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए भारत से संपर्क साधा। एस. जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच फोन कॉल के बाद ही युद्धविराम की प्रक्रिया तेज हुई।
पाकिस्तान की कूटनीति या ब्लैकमेल?
अब पाकिस्तान इस पूरे प्रकरण को रणनीतिक संतुलन की “मिच्योर” नीति कहकर पेश कर रहा है, लेकिन वैश्विक रणनीतिक हलकों में यह एक “परमाणु ब्लैकमेल” के रूप में देखा जा रहा है।
अब सवाल उठता है: क्या अमेरिका भविष्य में भी पाकिस्तान की इस परमाणु रणनीति का हिस्सा बनेगा, या भारत अपनी सुरक्षा नीति को और कठोर बनाएगा?









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