- भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने बदला अपना रुख
- पीएम मोदी ने अमेरिका को साफ कहा – अगर पाकिस्तान कुछ करेगा, जवाब कड़ा होगा
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने पहले पाकिस्तान, फिर भारत से की बात
- DGMO स्तर की बातचीत से पाकिस्तान ने बदली रणनीति
- अमेरिका ने दावा किया, ट्रंप ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सख्त सैन्य कार्रवाई की, जिसके बाद पाकिस्तान ने अचानक अपना रुख बदल लिया। 10 मई की सुबह अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत से पहले रुबियो पाकिस्तान के आर्मी चीफ सैयद असीम मुनीर से भी संपर्क में थे।

सूत्रों के अनुसार, 9 मई की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की थी और बढ़ते युद्ध के खतरे पर चिंता जताई थी। जवाब में मोदी ने स्पष्ट किया कि यदि पाकिस्तान कुछ करता है, तो भारत का जवाब “बहुत कड़ा” होगा।
इसके कुछ घंटों के भीतर पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइलों से भारत के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जिनमें आदमपुर एयरबेस और नगरोटा आर्मी बेस शामिल थे। इसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान के आठ एयरबेस को निशाना बनाया।
10 मई की सुबह रुबियो ने जयशंकर को फोन कर बताया कि पाकिस्तान भारत की शांति की शर्त “तुम गोली मत चलाओ, हम गोली नहीं चलाएंगे” को मानने के लिए तैयार है। इसी बातचीत में भारत ने स्पष्ट कर दिया कि भारत को पाकिस्तान की तरफ से आधिकारिक पुष्टि चाहिए।
बातचीत के दौरान पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से बात करने का अनुरोध किया। बातचीत दोपहर 3:30 बजे हुई। सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की ओर से सुर बदलना भारत की सख्त प्रतिक्रिया का नतीजा था।
इस बीच, अमेरिका ने कभी सार्वजनिक रूप से यह संकेत नहीं दिया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया पर यह दावा करेंगे कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर करवाया। भारत की तरफ से यह स्पष्ट किया गया कि कश्मीर पर किसी भी तरह की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।









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