- ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने PoK में 9 आतंकी ठिकानों पर किए सटीक हमले
- अमेरिका का पाकिस्तान पर आईएमएफ बेलआउट पैकेज को लेकर बढ़ा दबाव
- पाकिस्तान के DGMO ने भारत को फोन कर संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखा
- विदेश मंत्री जयशंकर और एनएसए डोभाल से अमेरिका ने की सीधी बातचीत
- पाकिस्तान ने बाद में समझौते का उल्लंघन किया, भारत ने की पुष्टि
भारत-पाकिस्तान युद्धविराम: ऑपरेशन सिंदूर और अमेरिकी दबाव के बाद कैसे बनी सहमति – जानें पूरी इनसाइड स्टोरी
ब्यूरो रिपोर्ट | BetulHub
भारत और पाकिस्तान के बीच बीते कुछ दिनों से जारी सैन्य तनाव अचानक शांत हुआ, और इसकी शुरुआत हुई एक फोन कॉल से। 10 मई को दोपहर 3:35 बजे पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (DGMO) मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्ला ने भारत के DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को फोन कर गोलीबारी और हवाई हमले रोकने का प्रस्ताव रखा। भारत ने इस प्रस्ताव को स्वीकार किया, हालांकि बाद में पाकिस्तान ने इस समझौते का उल्लंघन किया।

22 अप्रैल को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 7 मई को “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर रणनीतिक हमले किए। इसके बाद पाकिस्तान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिनके जवाब में भारत ने केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
सूत्रों के अनुसार, इस बार भारत ने अपनी सैन्य क्षमता का स्पष्ट संदेश देते हुए रावलपिंडी जैसे सामरिक ठिकानों तक पहुंच की क्षमता का प्रदर्शन किया।
इस बीच, अमेरिका का दबाव भी पाकिस्तान पर भारी पड़ा। अमेरिका ने साफ संकेत दिया कि अगर तनाव नहीं घटाया गया तो आईएमएफ बेलआउट पैकेज पर असर पड़ सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने पाकिस्तानी सेना प्रमुख से बात की। वहीं, अमेरिका के उपराष्ट्रपति वेंस भारत दौरे पर थे और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधी बातचीत की।
भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी और वायुसेना की विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि भारत युद्ध नहीं, बल्कि शांति की दिशा में बढ़ने को तैयार है – बशर्ते पाकिस्तान गंभीर हो।
पाक प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका को धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “पाकिस्तान क्षेत्रीय शांति के लिए इस समझौते को स्वीकार करता है।”




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