ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग में कर्नल सोफिया कुरैशी ने निभाई अहम भूमिका
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “महिला अधिकारियों का मनोबल गिराना ठीक नहीं”
- 69 महिला सैन्य अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई जारी
- कोर्ट का केंद्र को निर्देश: अगली सुनवाई तक सेवा से मुक्त न करें
- सेना में महिला स्थायी कमीशन पर फिर उठा बड़ा मुद्दा

नई दिल्ली।
ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह करने वाले भारतीय सैन्य ऑपरेशन में एक नाम खासतौर पर सामने आया – कर्नल सोफिया कुरैशी। उनकी बहादुरी और रणनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा के बीच अब उनका नाम सुप्रीम कोर्ट में भी गूंजा है।
9 मई 2025 को सुप्रीम कोर्ट में महिला सैन्य अधिकारियों को स्थायी कमीशन (Permanent Commission) न दिए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान कर्नल कुरैशी का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि ऐसी स्थिति में सेना की प्रतिभाशाली महिला अधिकारियों का मनोबल नहीं गिराया जाना चाहिए।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र से यह भी स्पष्ट किया कि अगस्त में अगली सुनवाई तक 69 याचिकाकर्ता महिला अधिकारियों को सेवा से मुक्त न किया जाए। उन्होंने कहा कि “इस वक्त उन्हें कोर्ट के चक्कर लगाने के लिए कहना उचित नहीं है। आप चाहें तो उनकी सेवाएं किसी अन्य मोर्चे पर ले सकते हैं।”
केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने इसे एक प्रशासनिक निर्णय बताते हुए कहा कि सशस्त्र बलों को युवा बनाए रखने की नीति के तहत हर साल केवल 250 स्थायी कमीशन दिए जा सकते हैं।
वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि कर्नल सोफिया कुरैशी को भी अपने स्थायी कमीशन के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख करना पड़ा था, और आज वह ऑपरेशन सिंदूर जैसे अहम मिशन में देश को गौरवान्वित कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह कानूनी है और इसका अफसरों की उपलब्धियों से सीधा संबंध नहीं है, लेकिन निर्णय नीतिगत दिशा देने वाले हैं।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने और लैंगिक भेदभाव समाप्त करने को लेकर बड़ा फैसला दिया था। उसके बाद से अदालत इस मुद्दे पर कई बार स्पष्ट आदेश दे चुकी है – चाहे वो थलसेना, नौसेना, वायु सेना, या तटरक्षक बल हों।









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