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SYL नहर, पंजाब-हरियाणा जल विवाद, भाखड़ा ब्यास बोर्ड, भगवंत मान, नायब सिंह सैनी
➡️ब्यौरा :
SYL नहर को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच फिर टकराव तेज हो गया है। पंजाब विधानसभा ने सोमवार को एक विशेष सत्र में प्रस्ताव पारित कर स्पष्ट किया कि वह “अपने हिस्से का एक बूंद पानी भी” हरियाणा को नहीं देगा। यह प्रस्ताव हरियाणा को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा 4,500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी छोड़ने के फैसले के विरोध में लाया गया।
हरियाणा लंबे समय से SYL (सतलुज-यमुना लिंक) नहर के निर्माण को पूरा करने की मांग कर रहा है, जिससे उसे 35 लाख एकड़ फुट (MAF) पानी मिल सके। जबकि पंजाब का कहना है कि राज्य के पास साझा करने के लिए कोई अतिरिक्त पानी नहीं है।

पंजाब सरकार का रुख
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य को धान की बुआई के लिए पानी की जरूरत है और हरियाणा ने पहले ही मार्च में अपने हिस्से का पानी इस्तेमाल कर लिया है। उन्होंने भाजपा पर भी आरोप लगाया कि वह केंद्र और BBMB के जरिए पंजाब पर दबाव बना रही है।
पंजाब विधानसभा अध्यक्ष कुलतार सिंह संधवान ने कहा, “यह सिर्फ पंजाब का अधिकार नहीं, बल्कि देशहित का मुद्दा है।” वहीं, मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने आरोप लगाया कि हरियाणा सरकार पंजाब का पानी चुराने की कोशिश कर रही है।
हरियाणा का पलटवार
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब सरकार के प्रस्ताव की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “अगर भगवंत मान सरकार इस तरह तुष्टिकरण करती रही, तो वह भी कांग्रेस की राह पर चली जाएगी।” उन्होंने पंजाब से बिना शर्त पानी छोड़ने की मांग की।
SYL नहर परियोजना की स्थिति
214 किलोमीटर लंबी इस नहर में 122 किमी हिस्सा पंजाब में और 92 किमी हिस्सा हरियाणा में है। हरियाणा अपने हिस्से का काम पहले ही पूरा कर चुका है, जबकि पंजाब ने 1982 में काम शुरू करने के बाद से इसे स्थगित कर रखा है।
मौजूदा विवाद की पृष्ठभूमि
BBMB हर साल 21 मई से अगले वर्ष 21 मई तक के जल वितरण का वार्षिक कोटा तय करता है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान इस जल स्रोत पर निर्भर हैं। बीते 23 अप्रैल को तकनीकी समिति ने हरियाणा को अतिरिक्त पानी देने की सिफारिश की थी, जिसे पंजाब ने खारिज कर दिया।









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