Highlights:
दृष्टिहीन रवि राज ने यूपीएससी में पाई 182वीं रैंक
मां विभा सिन्हा ने हर कदम पर निभाई आंखों और राइटर की भूमिका
रोजाना 10 घंटे पढ़ाई, मां-बेटे की अनूठी मेहनत
शारीरिक चुनौतियों को जज्बे से दी मात
बिहार के नवादा से निकली प्रेरणादायक सफलता की कहानी
मां बनी आंखें, बेटे ने हासिल की UPSC में 182वीं रैंक: जानिए रवि राज की प्रेरणादायक कहानी
हर साल लाखों उम्मीदवार यूपीएससी परीक्षा में सफलता का सपना देखते हैं, लेकिन कुछ कहानियां दिल को छू जाती हैं। बिहार के नवादा जिले के रवि राज ने ऐसी ही एक मिसाल पेश की है। दृष्टिहीन होते हुए भी रवि ने UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2023 में 182वीं रैंक हासिल कर पूरे देश का दिल जीत लिया।

मां बनीं रवि की आंखें और ताकत
रवि की सफलता में उनकी मां विभा सिन्हा का योगदान अमूल्य रहा। जब रवि पढ़ नहीं सकते थे, तो उनकी मां ने खुद स्टडी मटीरियल पढ़कर सुनाया। इतना ही नहीं, मां खाना बनाते समय यूट्यूब लेक्चर भी चलातीं और रवि के उत्तरों को रिकॉर्ड करतीं। मां-बेटे की इस टीम वर्क ने हर मुश्किल को आसान कर दिया।
रोज 10 घंटे पढ़ाई का जुनून
रवि और उनकी मां ने एक अनुशासित दिनचर्या बनाई। हर दिन 10 घंटे पढ़ाई होती थी। मां किताबें पढ़तीं और रवि सुनते, समझते और जवाब देते। अभ्यास के दौरान मां उनके उत्तर भी लिखतीं। शारीरिक और मानसिक कठिनाइयों के बावजूद, दोनों ने हार नहीं मानी।
जुनून और जज्बे की जीत
रवि राज की यह यात्रा केवल एक परीक्षा पास करने की नहीं, बल्कि एक उदाहरण बनने की है कि कैसे संकल्प, समर्थन और समर्पण के साथ किसी भी चुनौती को मात दी जा सकती है।
रवि राज और उनकी मां विभा सिन्हा की यह कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।









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