Highlights:
पहलगाम आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की मौत।
भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के बावजूद चीन शांत।
पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कालिता ने बताई वजह।
व्यापारिक दबावों और वैश्विक परिस्थितियों ने चीन को रोका।
बांग्लादेश सीमा और पूर्वोत्तर में भी बढ़ी सुरक्षा चुनौतियाँ
➡️ Article:
पहलगाम हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव पर चीन क्यों खामोश? जानिए रक्षा विशेषज्ञ की बड़ी वजह
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। इस हमले ने पूरे देश के साथ ही दुनियाभर में चिंता की लहर दौड़ा दी। भारत ने इस हमले के बाद आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।
माना जा रहा है कि इस हमले में पाकिस्तान कनेक्शन है और इसे 26/11 जैसे हमले की साजिश से जोड़कर देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है, लेकिन इस पूरे मामले में चीन की चुप्पी ने सबको हैरान कर दिया है।

रक्षा विशेषज्ञ और पूर्वी कमान के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) राणा प्रताप कालिता ने इस चुप्पी की अहम वजह बताई है। उन्होंने कहा कि मौजूदा भूराजनीतिक परिस्थितियां और व्यापारिक जटिलताएं चीन को इस संघर्ष से दूर रहने पर मजबूर कर रही हैं।
गलवान के बाद संबंधों में सुधार
कालिता ने याद दिलाया कि 2020 के गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के रिश्तों में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। दोनों देशों ने आपसी तनाव कम करने के लिए कई दौर की बातचीत की है। अब कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने और सीधी उड़ानों पर भी चर्चा हो रही है।
अमेरिका के टैरिफ ने चीन को किया कमजोर
उन्होंने बताया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्कों ने चीन की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाला है। चीन फिलहाल अपनी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऐसे में भारत जैसे बड़े बाजार से टकराव मोल लेना चीन के हित में नहीं है।
चीन-पाकिस्तान दोस्ती लेकिन दूरी बनाएगा चीन
कालिता ने यह भी कहा कि भले ही चीन और पाकिस्तान की दोस्ती जगजाहिर है, लेकिन अभी चीन के पाकिस्तान के समर्थन में खुले तौर पर भारत के खिलाफ आने की संभावना बेहद कम है। चीन फिलहाल अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए इस मामले में चुप रहना ही बेहतर समझ रहा है।
बांग्लादेश सीमा और पूर्वोत्तर में बढ़ा खतरा
कालिता ने चिंता जताई कि बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा खतरे बढ़ गए हैं। हाल ही में बांग्लादेश में कई आतंकी नेताओं की रिहाई और धार्मिक कट्टरता में वृद्धि से भारत के असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में स्थिति संवेदनशील हो गई है।
उन्होंने यह भी चेताया कि बांग्लादेश में आतंकी शिविरों के फिर से सक्रिय होने की संभावना को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसके चलते पूर्वोत्तर भारत में सीमा सुरक्षा पर अतिरिक्त ध्यान देना जरूरी हो गया है।




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