Highlights (Bold Words):
पहलगाम आतंकी हमला, भारत का कड़ा रुख, सिंधु जल समझौता स्थगित, विश्व बैंक से गुहार, भारत की कूटनीति
भारत की सख्त कार्रवाई से घबराया पाकिस्तान, सिंधु जल संधि पर विश्व बैंक से गुहार की तैयारी
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इस बार पाकिस्तान के खिलाफ अपने रुख को और सख्त कर लिया है। भारत ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अब सहने की सीमा खत्म हो चुकी है। सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के भारत के फैसले से पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। इस कदम ने पाकिस्तान की रणनीतिक चिंताओं को हवा दे दी है, और अब वह विश्व बैंक के सामने अपनी फरियाद लेकर जाने की तैयारी में है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का गुस्से से भरा बयान आया है कि अगर भारत ने कोई “गलती” की तो पाकिस्तान जवाब देगा। लेकिन भारत यह साफ कर चुका है कि वह अब किसी भी उकसावे पर चुप बैठने वाला नहीं है। 2019 में भारतीय पायलट अभिनंदन की वापसी की घटना आज भी भारत के दृढ़ संकल्प की मिसाल है।
इस बार पाकिस्तान की “गुहार” भी कुछ खास असर करती नहीं दिख रही। विदेश मंत्री इशाक डार भी सिंधु जल संधि का हवाला देकर वैश्विक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारत के सख्त कदमों ने पाकिस्तान की हालत “गिड़गिड़ाने” तक ला दी है।
भारत ने सिर्फ जल संधि ही नहीं, बल्कि अटारी-वाघा बॉर्डर पर आम आवाजाही को भी रोक दिया है। इसके साथ ही पाक उच्चायोग से सैन्य सलाहकारों की वापसी और भारतीय स्टाफ को भी बुला लिया गया है। यह दर्शाता है कि भारत की कूटनीति अब “नरम” नहीं, बल्कि निर्णायक हो चुकी है।
दूसरी तरफ पाकिस्तान फिर वही पुराना आरोप दोहरा रहा है कि भारत बेलुचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में अस्थिरता फैला रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय जानता है कि पाकिस्तान खुद आतंकवाद का गढ़ बन चुका है। भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब खून और पानी साथ नहीं बह सकते।









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