Highlights (मुख्य बिंदु):
भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से स्थगित की
पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में जवाबी कदमों पर होगा विचार
भारत ने राजनयिक संबंधों में कटौती और अटारी बॉर्डर किया बंद
पाकिस्तानी नागरिकों पर वीजा प्रतिबंध और SVES वीजा रद्द
पाकिस्तान में जल, ऊर्जा और खाद्य संकट
इस्लामाबाद/नई दिल्ली:
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई करते हुए सिंधु जल समझौता स्थगित कर दिया है। भारत सरकार ने यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिनमें से कई को आतंकियों ने धर्म के आधार पर चुनकर निशाना बनाया।
भारत के इन सख्त कदमों के जवाब में पाकिस्तान ने भी अपनी रणनीति पर विचार शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बुधवार रात कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में गुरुवार को राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक होगी। इस बैठक में सेना प्रमुखों समेत कैबिनेट मंत्री शामिल होंगे और भारत के कदमों का “उचित जवाब” तय किया जाएगा।
भारत ने उठाए ये 5 बड़े कदम:
1. सिंधु जल समझौता स्थगित – जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को नहीं रोकता, यह स्थगन लागू रहेगा।
2. राजनयिक संबंधों में कटौती – 01 मई 2025 तक उच्चायोग स्टाफ घटाकर 30 किया जाएगा।
3. अटारी बॉर्डर बंद – 1 मई तक भारतीय नागरिकों को वापसी की अनुमति, फिर बॉर्डर बंद।
4. वीजा प्रतिबंध – SVES वीजा रद्द, पाक नागरिकों को 48 घंटे में भारत छोड़ने का आदेश।
5. भारतीय स्टाफ की वापसी – इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग से रक्षा सलाहकारों की वापसी।
इन कदमों की जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दी, जिन्होंने साफ कहा कि भारत, पहलगाम हमले के अपराधियों और उनके समर्थकों को जवाबदेह ठहराएगा।
सिंधु जल संधि: क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई यह संधि विश्व बैंक की मध्यस्थता में संपन्न हुई थी। इसमें भारत को रावी, ब्यास और सतलज नदियों का पूर्ण अधिकार मिला था, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों के जल का प्रमुख उपयोगकर्ता माना गया।
पाकिस्तान को इस समझौते के तहत 80% पानी मिलता है, जिससे उसकी कृषि और पीने के पानी की आपूर्ति होती है।
समझौता रुकने से पाकिस्तान को होने वाले नुकसान:
कृषि संकट: 17 लाख एकड़ भूमि सिंधु प्रणाली पर निर्भर, फसल उत्पादन घटेगा
खाद्य संकट: गेहूं, चावल, कपास की पैदावार पर सीधा असर
ऊर्जा संकट: जलविद्युत उत्पादन में कमी, लोडशेडिंग बढ़ेगी
आर्थिक झटका: GDP पर गहरा प्रभाव, महंगाई और गरीबी बढ़ेगी
सामाजिक अशांति: ग्रामीण क्षेत्रों में विरोध, पानी के बंटवारे पर प्रांतीय तनाव
अब क्या करेगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान इस मुद्दे को फिर से विश्व बैंक या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ले जा सकता है, लेकिन भारत का रुख कड़ा है। 1948 में भारत पहले भी पाकिस्तान के पंजाब की नहरों का पानी रोक चुका है, जिससे बड़ा संकट पैदा हुआ था।
इस बार भी ऐसा ही जल संकट पाकिस्तान के दरवाजे पर दस्तक दे सकता






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