
Highlights (हाइलाइट्स):
- वक्फ संशोधन बिल पर JDU के समर्थन से मुस्लिम नेताओं में गहरी नाराजगी
- कई मुस्लिम नेताओं ने पार्टी से दिया इस्तीफा, JDU को चुनावी नुकसान की आशंका
- मेहर इकबाल ने कांग्रेस और RJD पर मुस्लिम नेताओं को बदनाम करने का लगाया आरोप
- सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही हैं JDU के मुस्लिम नेताओं के खिलाफ अफवाहें
- RJD ने आरोपों को बताया झूठा, JDU को बताया BJP की सोच से प्रभावित
Rewritten News for BetulHub:
पटना: बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है, और इस बार मुद्दा है वक्फ संशोधन बिल पर JDU का समर्थन। इस फैसले से पार्टी के मुस्लिम नेताओं में भारी बेचैनी देखी जा रही है। कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी है, जिससे JDU की मुस्लिम वोट बैंक को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के बिहार प्रभारी और प्रदेश महासचिव मेहर इकबाल हैदर ने बड़ा बयान देकर सियासी हलचल और तेज कर दी है।

मेहर इकबाल ने महागठबंधन की कुछ पार्टियों पर आरोप लगाया है कि वे सुनियोजित तरीके से JDU के मुस्लिम नेताओं को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे झूठे दावे फैलाए जा रहे हैं कि मुस्लिम नेता पार्टी से नाराज हैं और इस्तीफा दे रहे हैं, जबकि यह विपक्षी दलों की एक चाल है।
हालांकि, इस मामले में विपक्षी RJD ने पलटवार करते हुए कहा कि JDU नेता जनता के गुस्से से बचने के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं। RJD प्रवक्ता एजाज अहमद ने कहा कि JDU खुद भाजपा के विचारों में समाहित हो चुकी है और अब इसके मुस्लिम नेता खुद को असहज महसूस कर रहे हैं।
कौन-कौन नेता हुए अलग:
पूर्वी चंपारण के ढाका प्रखंड से शुरुआत हुई थी जब 15 नेताओं ने इस्तीफा दिया। इसके बाद मोहम्मद कासिम अंसारी, नवाब मलिक, मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीम, एम राजू नैयर और किशनगंज से मास्टर मुजाहिद जैसे बड़े नाम भी पार्टी छोड़ चुके हैं।
वरिष्ठ नेताओं की प्रतिक्रिया:
पूर्व सांसद अहमद अशफाक करीम, एमएलसी गुलाम गौस और गुलाम रसूल बलियावी ने भी वक्फ बिल पर पार्टी की स्थिति का विरोध जताया। बलियावी ने यहां तक कह दिया कि “अब सेक्युलर और कम्युनल में कोई फर्क नहीं रह गया है।”
JDU के सामने अब चुनौती है कि वह कैसे अपने अल्पसंख्यक नेताओं को साथ रखे और आगामी चुनावों में संभावित नुकसान से बच सके।









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