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पोप फ्रांसिस, संत श्री नारायण गुरु, सामाजिक सुधारक, जातिवाद, SNDP
ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का सोमवार, 21 अप्रैल की सुबह कासा सांता मार्टा स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। 88 वर्षीय पोप पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन की खबर ने ईसाई समुदाय समेत पूरी दुनिया को शोक में डुबो दिया है।
पोप फ्रांसिस अपने दयालु स्वभाव और मानवता के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। पिछले साल दिसंबर 2024 में उन्होंने भारत के महान संत श्री नारायण गुरु की खुलकर सराहना की थी।

किस संत की की थी तारीफ?
संत श्री नारायण गुरु, एक प्रसिद्ध दार्शनिक, कवि और समाज सुधारक, जिन्होंने केरल में जातिवाद के खिलाफ आंदोलन चलाया। उन्होंने “एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर” का नारा दिया और श्री नारायण धर्म परिपालन योगम (SNDP) की स्थापना की।
पोप ने क्या कहा था?
पोप फ्रांसिस ने कहा था कि “संत नारायण गुरु का सार्वभौमिक मानव एकता का संदेश आज के दौर में बहुत प्रासंगिक है।” उन्होंने यह बात केरल के एर्नाकुलम जिले में आयोजित सर्व-धर्म सम्मेलन की शताब्दी के अवसर पर कही थी।
पोप ने आगे कहा, “दुनिया में बढ़ती नफरत और अशांति का कारण धार्मिक शिक्षाओं को न अपनाना है।” उन्होंने नारायण गुरु को धार्मिक और सामाजिक चेतना के अग्रदूत के रूप में सम्मानित किया।
कौन थे श्री नारायण गुरु?
श्री नारायण गुरु का जन्म 22 अगस्त 1856 को केरल के तिरुवनंतपुरम जिले में हुआ था। वे एझावा जाति से थे जिन्हें उस समय नीची जाति माना जाता था। उन्होंने समानता, शिक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता का समर्थन किया।
वे अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रस्तावक थे और सभी में एक ही ईश्वर के अस्तित्व की बात करते थे। उनकी प्रमुख रचनाओं में अद्वैत दीपिका, आत्मविलासम, दैव दसकम और ब्रह्मविद्या पंचकम शामिल हैं!









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