हाइलाइट्स (Highlights):
- अमेरिका ने चीन पर 125% टैरिफ लगाकर दिया कड़ा संदेश
- भारत समेत कई देशों को मिली 90 दिन की राहत
- दवाइयों और सेमीकंडक्टर सेक्टर को टैरिफ छूट से फायदा
- अमेरिकी कंपनियों का झुकाव अब भारत जैसे देशों की ओर
- ट्रंप-मोदी के बीच व्यापार डील की उम्मीद बढ़ी
रीराइट की गई न्यूज़ (Betulhub स्टाइल में):
चीन को झटका, भारत को राहत: ट्रंप के टैरिफ फैसले से बदल सकता है व्यापार का नक्शा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक व्यापार पर बड़ा वार करते हुए चीन पर 125% आयात शुल्क (टैरिफ) लगा दिया है। यह कदम अमेरिका के उस रुख को दर्शाता है जिसमें वह अब किसी भी अनुचित ट्रेड व्यवहार को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। जहां चीन को इस फैसले से बड़ा झटका लगा है, वहीं भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह एक सुनहरा मौका बनकर सामने आया है।
खास बात ये है कि अमेरिका ने दर्जनों देशों को 90 दिन की राहत दी है, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत पर 26% आयात शुल्क था, लेकिन दवा और सेमीकंडक्टर सेक्टर को टैरिफ में छूट मिली है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का मौका मिला है।

क्यों फायदा में है भारत?
कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब चीन के बजाय भारत जैसे स्थिर और कम टैरिफ वाले देशों में निवेश की तैयारी कर रही हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच व्यापार समझौते को लेकर सकारात्मक बातचीत जारी है और इस साल के अंत तक डील फाइनल हो सकती है।
चीन पर सीधा वार, बाकी देशों से सुलह
अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेन्ट ने भले ही सीधे चीन का नाम न लिया हो, लेकिन उनके बयान से साफ है कि टारगेट कौन है। वहीं जापान, वियतनाम, साउथ कोरिया और भारत जैसे देशों से अमेरिका बातचीत कर रहा है, जिससे नए व्यापार समीकरण बन सकते हैं।
ट्रेड वॉर की आंच
चीन ने भी जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 34% से बढ़ाकर 84% कर दिया। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ 125% टैरिफ का ऐलान किया। अमेरिका का दावा है कि इस रणनीति से अब तक 75 से ज्यादा देश बातचीत की मेज पर आ चुके हैं।









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