69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों की नजरें आज सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं। आंदोलनरत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी लगातार लखनऊ के ईको गार्डन में धरने पर बैठे हैं। 25 जनवरी से जारी यह धरना अब निर्णायक मोड़ पर है, क्योंकि आज 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में इस बहुप्रतीक्षित मामले की सुनवाई होनी है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के आदेश का पालन करे और तत्काल नई चयन सूची जारी कर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करे। उनका आरोप है कि वर्ष 2018 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के साथ अन्याय हुआ और उन्हें नौकरी से वंचित किया गया।

सरकार पर हीलाहवाली का आरोप
अभ्यर्थियों का कहना है कि लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उनके हित में फैसला दिया, लेकिन सरकार अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाई है। वे मांग कर रहे हैं कि पुरानी सूची बनाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए और नई सूची जल्द प्रकाशित कर सभी योग्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे जाएं।
नेताओं के आवास का किया घेराव
प्रदर्शनकारियों ने उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रावधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल के आवास का भी घेराव किया था। इस दौरान आशीष पटेल ने बाहर आकर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की और उन्हें आश्वासन दिया कि सरकार उनके साथ है और जल्द ही भर्ती प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाएगी।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर हैं, जो इस आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।









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