आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक में रेपो रेट कटौती की उम्मीद, ईएमआई हो सकती है कम
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 54वीं बैठक 7 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और 9 अप्रैल को फैसले का ऐलान होगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि आरबीआई एक बार फिर रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर सकता है। यदि ऐसा हुआ, तो इससे लोन सस्ते होंगे और आपकी EMI में कमी आएगी।
मुद्रास्फीति में नरमी और स्थिर तरलता की स्थिति को देखते हुए RBI के पास दरों में कटौती का अच्छा मौका है। फरवरी में भी RBI ने रेपो दर को घटाकर 6.25 प्रतिशत किया था, जो मई 2020 के बाद पहली कटौती थी।

ट्रंप के टैरिफ से बढ़ी वैश्विक चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए जवाबी आयात शुल्क ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई चुनौती दी है। इसके प्रभाव को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक भी मौद्रिक नीति में बदलाव कर सकता है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट मदन सबनवीस का मानना है कि वैश्विक संकट के बीच घरेलू अर्थव्यवस्था को समर्थन देना जरूरी है। ऐसे में रेपो दर में कटौती की पूरी संभावना बनती है।
क्या कहती हैं रेटिंग एजेंसियां और उद्योग संगठन
रेटिंग एजेंसी ICRA भी उम्मीद जता रही है कि RBI इस बार तटस्थ रुख अपनाते हुए दरों में कटौती करेगा। हालांकि CRR में बदलाव की संभावना कम है।
वहीं, एसोचैम का मानना है कि मौजूदा हालात में RBI को ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपनानी चाहिए क्योंकि हाल ही में बाजार में तरलता पहले से ही बढ़ाई गई है।
अगस्त तक हो सकती है और कटौती
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल RBI कुल 1 प्रतिशत तक की कटौती कर सकता है। यदि वैश्विक मंदी की स्थिति बनती है, तो अगस्त 2025 तक रेपो दर 5.5% तक लाई जा सकती है, जो अगस्त 2022 के बाद सबसे कम स्तर होगा।
क्या होती है रेपो दर?
रेपो रेट वह दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसमें कटौती होने से बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है, जिससे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की दरें भी घटती हैं। वहीं, रेपो दर बढ़ने से कर्ज महंगे हो जाते हैं।









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