✅ आतंकियों की संख्या में भारी गिरावट
✅ हिजबुल मुजाहिदीन और जेकेएलएफ का पतन
✅ ऑपरेशन ऑल आउट से 1,607 आतंकियों का सफाया
✅ अनुच्छेद 370 हटने के बाद माहौल में बदलाव
✅ रोजगार और विकास से युवाओं को नई राह

कश्मीर में शांति की नई इबारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की नीतियों के चलते कश्मीर में आतंकवाद का अंत होता दिख रहा है। कभी आतंक और अलगाववाद का केंद्र रहे संगठनों जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे समूह अब कमजोर पड़ चुके हैं। अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में हालात पूरी तरह बदल गए हैं।
JKLF और हिजबुल का पतन
जेकेएलएफ के नेता यासीन मलिक के जेल में बंद होने के बाद संगठन पूरी तरह निष्क्रिय हो चुका है। वहीं, कभी घाटी के सबसे बड़े आतंकी संगठनों में से एक हिजबुल मुजाहिदीन के कई सदस्य 2020 और 2021 में आत्मसमर्पण कर चुके हैं। सुरक्षाबलों की सख्ती और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के कारण आतंकवादियों की संख्या में भारी कमी आई है।
ऑपरेशन ऑल आउट: 1,607 आतंकियों का सफाया
गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2015 से 2024 तक 1,607 आतंकियों का खात्मा हो चुका है।
आंकड़े:
- 2015: 108 आतंकी मारे गए
- 2016: 150 आतंकियों का सफाया
- 2017: 213 आतंकी ढेर
- 2018: 257 आतंकियों का अंत
- 2019: 154 आतंकियों को मार गिराया
- 2020: 221 आतंकी मारे गए
- 2021: 182 आतंकियों का खात्मा
- 2022: 172 आतंकी मारे गए
- 2023: 75 आतंकी मारे गए
- 2024: अब तक 75 आतंकी मारे जा चुके हैं
बदलते हालात: आतंकवाद से विकास की ओर
कश्मीर में यह बदलाव केवल सैन्य अभियानों की वजह से नहीं आया, बल्कि केंद्र सरकार की सख्त नीतियां, अनुच्छेद 370 हटने के बाद बदला माहौल और रोजगार के अवसरों में वृद्धि भी एक बड़ी वजह है। अमित शाह के अनुसार, जो संगठन भारत के खिलाफ साजिश रचते थे, वे अब समझ चुके हैं कि हिंसा से कुछ हासिल नहीं होगा।
निष्कर्ष
आज का कश्मीर धीरे-धीरे आतंकवाद से मुक्त हो रहा है। सरकार की योजनाओं और सुरक्षाबलों की रणनीति के चलते युवा अब हथियार नहीं उठा रहे, बल्कि विकास की राह चुन रहे हैं। इस बदलाव से साफ है कि आतंक फैलाने वालों का अंत निकट है









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