मुख्य बिंदु:
- दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में मिली भारी मात्रा में नकदी।
- आग बुझाने पहुंचे दमकल कर्मियों को मिला नोटों का ढेर, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला।
- CJI संजीव खन्ना ने जस्टिस वर्मा का फौरन इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर किया।
- 55 राज्यसभा सांसदों ने न्यायपालिका की जवाबदेही बढ़ाने की मांग को लेकर पत्र लिखा।
- महाभियोग की संभावना, सुप्रीम कोर्ट की जांच के बाद होगा अगला फैसला।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगने के बाद जब दमकल कर्मी आग बुझाने पहुंचे, तो उन्हें अंदर नकदी का बड़ा ढेर दिखाई दिया। मामला सामने आते ही यह सूचना उच्च अधिकारियों और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। इस घटना के बाद न्यायपालिका की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस शुरू हो गई है।

फौरन ट्रांसफर, आगे क्या होगा?
CJI संजीव खन्ना ने कोलेजियम बैठक बुलाकर जस्टिस वर्मा का तत्काल इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया। हालांकि, सवाल यह उठ रहा है कि क्या ट्रांसफर ही आखिरी कदम होगा या जांच के बाद कड़ी कार्रवाई भी होगी?
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो महाभियोग प्रस्ताव लाकर उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। महाभियोग पारित होने के बाद अन्य कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
राज्यसभा में बवाल, 55 सांसदों का पत्र
इस मुद्दे को राज्यसभा में कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने उठाया और बताया कि 55 सांसदों ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर न्यायपालिका की जवाबदेही बढ़ाने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। इससे साफ है कि यह मामला जल्द खत्म नहीं होगा और आगे बड़ी कार्रवाई हो सकती है।









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