मुख्य बिंदु:
- भारतीय शोधकर्ता बादर खान सूरी को अमेरिका में हमास के समर्थन और इजरायल समर्थक मोदी सरकार की आलोचना करने पर गिरफ्तार किया गया।
- अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी अधिकारियों ने उन पर हमास की प्रचार सामग्री फैलाने और एंटी-सेमिटिजम को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
- जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय ने कहा कि सूरी के किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने की जानकारी नहीं है।
- उनकी पत्नी मफाज सालेह, जो फिलस्तीनी नागरिक हैं, हमास के एक वरिष्ठ सलाहकार की बेटी हैं।
- उनके वकील ने गिरफ्तारी को “अवैध अपहरण” बताया और कहा कि सूरी निर्दोष हैं।
पूरा समाचार:
अमेरिका में स्थित जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के शोधकर्ता बादर खान सूरी को वहां की पुलिस ने हमास का समर्थन करने और इजरायल समर्थक नीतियों के लिए मोदी सरकार की आलोचना करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन उन्हें देश से निर्वासित करने की भी योजना बना रहा है।

सूत्रों के अनुसार, सूरी के सोशल मीडिया पोस्ट की जांच में सामने आया कि उन्होंने गाजा पर इजरायल के हमलों और भारत के इजरायल को मिसाइल सप्लाई करने की कड़ी आलोचना की थी। 6 जून 2024 को एक पोस्ट में उन्होंने लिखा:
“फिलस्तीनी बच्चों को मारने के लिए इजरायल को मिसाइलें सप्लाई करना ‘मेड इन इंडिया’ के लिए एक शर्मनाक बदलाव है। खून की कीमत पर मूल्यों का परिवर्तन है। यह शर्मनाक है।”
गिरफ्तारी के पीछे के कारण
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी ने बताया कि सूरी को एक विशेष कानून के तहत हिरासत में लिया गया है, जो निर्वासन की अनुमति देता है। उन पर आरोप है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर हमास की विचारधारा का प्रचार किया और यहूदी-विरोधी कंटेंट फैलाया।
कौन हैं बादर खान सूरी?
सूरी जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के अलवलीद सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज के पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं। वह दक्षिण एशिया में बहुसंख्यकवाद और अल्पसंख्यक अधिकारों पर पढ़ाते हैं और इराक और अफगानिस्तान में शांति-निर्माण पर शोध कर रहे हैं।
परिवारिक पृष्ठभूमि और पत्नी के हमास कनेक्शन
सूरी की पत्नी मफाज सालेह एक फिलस्तीनी नागरिक हैं और उनके पिता अहमद यूसुफ हमास के वरिष्ठ राजनीतिक सलाहकार माने जाते हैं। दोनों की मुलाकात 2011 में गाजा में हुई थी और 2014 में उनकी शादी हुई।
वकील ने बताया “अवैध गिरफ्तारी”
सूरी के वकील हसन अहमद ने कहा कि यह गिरफ्तारी “अवैध अपहरण” की तरह है। उन्होंने कहा,
“अगर एक विद्वान, जो संघर्ष समाधान पर ध्यान केंद्रित करता है, उसे सरकार विदेशी नीति के लिए हानिकारक मानती है तो शायद समस्या सरकार में है, विद्वान में नहीं।”
जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय का बयान
विश्वविद्यालय ने कहा कि उन्हें सूरी के किसी अवैध गतिविधि में शामिल होने की जानकारी नहीं है और उनकी गिरफ्तारी के कारणों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।









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