नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार (18 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकुंभ 2025 और भारत की सांस्कृतिक चेतना पर अपना संबोधन दिया। उन्होंने महाकुंभ को भारत की आध्यात्मिक शक्ति और संस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बताते हुए इसे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के साथ जोड़ा। पीएम मोदी ने इस आयोजन को भारत की आत्मनिर्भरता और वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

विपक्ष ने जताई नाराजगी, सदन से किया वॉकआउट
पीएम मोदी के संबोधन के बाद विपक्षी दलों ने अपनी बात रखने की मांग की, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिला। इसे लेकर समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने आपत्ति जताई और कहा कि प्रधानमंत्री ने मृतकों का जिक्र नहीं किया, जिससे उनकी असंवेदनशीलता झलकती है। इसी के विरोध में विपक्षी सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
महाकुंभ पर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश
पीएम मोदी ने अपने भाषण में महाकुंभ को भारतीय संस्कृति की धरोहर बताते हुए इसे भारत के हजारों वर्षों की आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक कहा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है और इसे वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनाता है।
विपक्ष ने भाषण पर उठाए सवाल
विपक्ष का कहना है कि पीएम मोदी का भाषण एकतरफा था और उन्होंने किसी अन्य दल को अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया। सांसद अवधेश प्रसाद ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने मृतकों और महाकुंभ की तैयारियों से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया। इसी के चलते विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सदन से वॉकआउट किया।
निष्कर्ष
महाकुंभ 2025 को लेकर लोकसभा में प्रधानमंत्री मोदी का भाषण भले ही भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना पर केंद्रित था, लेकिन विपक्ष ने उनकी संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच मतभेद खुलकर सामने आए।









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